एक हसीन गुनाह हुआ तेरे मेरे दरमिया

एक हसीन गुनाह हुआ तेरे मेरे दरमिया,

दे सजा जो रजा हो बस तेरी पनाह मोरे पिया |

तेरी जुस्तजू कर लू ,

दफन हर आरजू कर लू |

मेरी चाहत का कुछ असर करदे ,

खुद को मुझे मयस्कर कर दे|

तुझसे हे सफ़र तू हि हमसफ़र हे,

एक अजीब सिरहन एक गजब डर हे |

तन्हा हर लम्हा हुआ तेरे मेरे दरमिया,

एक हसीन गुनाह हुआ तेरे मेरे दरमिया |

तेरी सिफारिस करू

खुशियों को तेरा वारिस करू

छूती रहे तेरे लबो को मेरी बारिसे|

तेरा मिजाज पढू

तेरा अंदाज गडू

पूरी हो मेरी दुआ से तेरी ख्वाइसे |

शुरु हो मदोहोसिया तेरे मेरे दरमिया|

एक हसीन गुनाह हुआ तेरे मेरे दरमिया|

मुझमे मिल जा मेरी हिफाजत करदे

मुझमे गुल जा कुछ शरारत करदे |

थोड़ी करामाती हे मेरी इबादत बन जा

थोड़ी खुराफाती हे मेरी आदत बन जा |

एक खवाब पलने लगा तेरे मेरे दरमिया

एक हसीन गुनाह हुआ तेरे मेरे दरमिया |

pic source-internet sodahead

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