विस्थापन (displacement) नहीं होता जिंदगी में

विस्थापन (displacement) नहीं होता जिंदगी में
बस दुरी (distance) होती है ।
कोई सबसे छोटा रास्ता नहीं
जो मिला दे
तूझे और मुझे ।
ये दुरी बिलकुल नहीं मानती
गणित के घिसे पिटे बोरिंग नियम
मुझे उस तक पहुचने में लगते है 12 घंटे
उसे मुझ तक आने में एक उम्र लग जाती है ।
देखो ना
मैं तुझसे जितनी दूर खड़ा हूँ
क्या हूँ मैं भी तुम्हारे उतने ही पास?
तुम मुझे जितना दूर करती हो
क्या मुझसे भी उतनी दूर हो जाती हो ?
कितनी अनभिज्ञ है सच से
ये परेशान दुनिया
क्यों किसी को नहीं पा सकते ?
हज़ार कोशिशो के बाद ।
क्यों ठहरी सी लगती है जिंदगी ?
मीलो चलकर भी ।
क्योंकि मेरे यार
विस्थापन नहीं होता जिंदगी में
बस और बस दुरी होती है ।
केवल और केवल
मौत में मिलेगा
तुम्हे विस्थापन
जितनी दुरी पर मौत मुझसे खड़ी है
उतनी ही दुरी पर मैं खड़ा हूँ मौत से ।-नागेश पांचाल

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