एक खामोस दर्द

अपना सा महसूस करता हूँ

हे ओडिसियस तुम्हे |odyssey

मैं तुमसा पराक्रमी नहीं

ना ही सूर्य सा आभामंडल मुझमे

तीर्वता में, मैं शून्य हूँ |

विवेक खो देता हूँ अक्सर

दिल के किसी छल में आकर |

ना तुम सी बुधिमत्ता,

ना वो अनुपमेय वाकचातुर्य |

किसी रणभूमि में नहीं मौजूद

मेरे जिस्म की एक भी बूंद

फ़िर भी

ओ ज्यूस-सम्भूत लेयरतीज के पुत्र ओडिसियस

जोड़ देता है मुझे, तुझसे

एक खामोस दर्द

 

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