ख़ाली झूलते फंदे |

rohith-vermulaएक अधूरी ग़ज़ल

मिट्टी में दफ़न हुई और

अंकुरित हो गए ,

असंख्य मतले |

वेदना, संवेदना, विषाद

रिश्ते, राजनीति, अहसास, एहसान

रकीब, हबीब

सब जोड़ दो

लेकिन गैरवाजिब

और नामुमकिन है

मतले का मकता होना |

यारो,

फंदे में गर्दन भयानक है ,

पर सबसे भयानक है

आँखों में बसे

असंख्य, अनन्त

ख़ाली झूलते फंदे |

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