वो जो हममे तुममे क़रार था

वो जो हममे तुममे क़रार था तुम्हें याद हो के ना याद हो
वही यानी वादा निभाः का तुम्हें याद हो के ना याद हो |

बेगम अख्तर की दर्द भरी आवाज़ का सम्मोहन और मोमिन खां मोमिन की तकरीर की जद में मैं का वज़ूद काफूर हो जाता | हम का दर्द तभी जेहन में हर शेर के साथ फैलने लगता है | मैं अगर अकेला है तो वो तनहा हो जाता है लेकिन वो अगर हम में से निकाला गया है तो वो दर्दनाक हो जाता है |

वो नये गिलहे वो शिकायतें वो मज़े-मज़े की हिकायते
वो हर एक बात पे रूठना तुम्हें याद हो के न याद हो

ये ग़ज़ल ऐसी है जिसमे आपके कानो में पड़ी आवाज़ का एक एक हिस्सा आपको परितृप्त कर देगा लेकिन आप का दिल फिर भी वहीँ उलझकर रह जायेगा क्योंकि एक अलग प्यास उस तृप्ति से जन्म लेती है जो नितान्त है, अनश्वर है |

कभी हम में तुम में भी चाह थी कभी हम से तुम से भी राह थी
कभी हम भी तुम भी थे आश्ना तुम्हें याद हो के न याद हो

इस ग़ज़ल में विरोध है, उपहास है, दर्द है, प्यार है, इंतज़ार है ,भरोसा है, धोखा है | सबसे बड़ा जख्म ये शब्द ‘कभी’ है | ये कभी जो कल था ये आज क्यों नहीं है ? और गर आज नहीं है तो ये कल था ही क्यों ?

जिसे आप कहते थे बावफ़ा जिसे आप गिनते थे आश्ना
मैं वही हूँ “मोमिन”-ए-मुब्तला तुम्हें याद हो के न याद हो|

ये ग़ज़ल बावफा के बेवफ़ा हो जाने की कशिश है | वो कौन था जिसे वो अपना समझते थे ? अगर वो मुझे अपना समझते थे तो मैं तो अब भी वहीँ हूँ, तो आख़िर ये दर्द से पीड़ित अपरिचित कब हो गया? क्या है जो बदल गया ?

इस ग़ज़ल का विषाद अनुपमेय है, इसकी प्रासंगिगता काल के आगोश से परे है | मोमिन महान ग़ालिब के समकालीन रहे है | एक शेर के बदले ग़ालिब ने उन्हें पूरा दीवान देने की बात कहीं थी | शेर यूँ था कि

तुम मेरे पास होते हो गोया,
जब कोई दूसरा नहीं होता |

खयालों में इस तरह किसी का बसा होना कितना दिलकश लगता है लेकिन अगर वो न हो तो एक टीस देखिये

तुम हमारे किसी तरह न हुए,                                                                                                               वर्ना दुनिया में क्या नहीं होता ।

खैर अगर आज मोमिन जिन्दा होते तो उन्हें वसीम बरेलवी साहब का एक शेर जरुर पसंद आता

उसी को जीने का हक़ है जो इस ज़माने में                                                                                                   इधर का लगता रहे और उधर का हो जाये |

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