तारुफ़ नही कराऊंगा मैं अपना (एकल अभिनय लेख)

तारुफ़ नही कराऊंगा मैं अपना |

माशाअल्लाह अब वक्त आ गया है कि आप लोगो को उनके नाम,उनके ओहदे से नहीं बल्कि उनके मिजाज़ से जाने |

मैं यहाँ किसी का सफीर बनकर नहीं आया हूँ और ना ही मुझे सफीना समझकर आप दरिया पार करने की कोशिश करे | आपको किसी मसीहा की जरुरत नहीं | हर आदमी अपना अफसाना ख़ुद लिखता है | अपने लिखे पर आपको रोना है,और अपने ही लिखे पर आपको हसना है | लेकिन जो तसल्ली का कीड़ा है ना घर…… कर गया है आपके जेहन में | ये कीड़ा एक दिन आपकी जान ले लेगा |

मुल्क की फिजा आँखों के सामने है और आपको हकीकत पता है | अंधेपन का ढोंग ना करे वर्ना एक दिन आपके देखने पर भी पाबन्दी लगा दी जाएगी |

और ये माहौल यहाँ ही नहीं पुरे कौम में पुरे मुल्क में फैला हुआ है | जमुरियत के नाम पर तानाशाही हावी हो रही है | जब जब हमारी आवाज दबाने की साजिश की  जाती है हमारे कौम के रखवाले जो ख़ुद को बड़ा खुदापरस्त और महजबी समझते है……. पान चबाते रहते है…….. और खामोश बैठे रहते है | मोलवी साहब आँखे निचे ना कीजिये | ये वक्त आँखों से आँखों को मिलाने का है |

लेकिन हमें क्या करना मोलवी साहब मुल्क की हालत से | जो पार्टी हमारा जेब भर दे हम तो हो गए उसके साथ | गुजिस्ता दिनों फतवा भी ऐसे आते है जिन्हें आम मुसलमान तो क्या ख़ुद मोलवी साहब नहीं मानते | ये ये ये …..बज्म मुजमहिल है ना इस से काम नहीं चलेगा हमें मुस्ताख होना पड़ेगा | हमें मुखर होना पड़ेगा | आवाज़ उठाना पड़ेगी और हर दबी आवाज़ से  आवाज मिलाना पड़ेगी |

ये दंगे फ़साद कभी गोधरा कभी मुंबई कभी कभी मुज़फरनगर और अब तो गाँवो में……. दादरी | सियासतदानों ने ऐसे हालत पैदा कर दिए है कि बस नफरत ही नफरत है हर आँखों में,कुर्बत का कहीं नामोनिशान नहीं | गाय भेंस….. ये जिंदाबाद ……वो मुर्दाबाद…… उसकी जय …..इसकी विजय….. ये बोलो….. यहाँ मुह मत खोलो पाकिस्तान चले जावो …………. मादरे वतन की कसम हम इस मुल्क के है और हमें इस मुल्क से उतनी ही मोहबत है जितनी किसी हिन्दू को | लेकिन माहजब के नाम पर हमारी जमी को मकतल बनाने वालो के इरादे नेक नहीं है उनके मकसद…..उनकी मनसा…..ही भी वतनपरस्ती की गवाही नहीं देती |

किस बात का रोना रोते है ये आज़ादी …नहीं नहीं नहीं …साथियो ये सनद रहे कि गोरो ने हिन्दुस्तान मुग़ल शासको से छिना था …जितना खून हमारा बहा है उतना इनका नहीं ..हमें लुटा गया था | १८५७ की क्रांति के बाद क्या हुआ ? मुसलमानों को देखकर गोली मर देते थे दिल्ली में | हमारे वजीरेआजम के बेटो को सरे आम चांदनी चोक पर लटका दिया गया | और ये..ये आजकल के लोग बात करते है कि हमने उनके मंदिरों को नेस्तनाबूद कर दिया…….. उनके कोमी ग्रंथो को जला दिया | हुमायु ने बाबर को ख़त लिखा था जिसमे साफ लिखा था कि हमें कोम के बीच भेदभाव नहीं करना है | जरा पूछो अपने बाप दादाओं  से कि तुलसी ने रामयण कब लिखी और कहाँ लिखी ……

असल में बात ये है कि जमीर ठन्डे हो गए है तुम्हारे…खून में उभाल नहीं है और आँखों की शर्म ….खैर छोड़ो..लेकिन एक बात ध्यान रहे अगर इसी तरह बने रहे तो एक दिन इस मुल्क की जमी से हमारा और हमारी कोम का नामोनिसान मिट जायेगा | जरुरत है एक सिस्टेमेटिक बदलाव की …..एक तोर तरीके की जिसे कौम को अपनाना पड़ेगा | काली सलवार और बदन ढंकने से काम नहीं चलेगा | कबीर कह गया था की चुतियो अल्लाह बहरा नहीं है | मोबाइल रखना अच्छी इल्म पाना  जरुरत है….. लेकिन ये उसी के खिलाफ फ़तवा जारी करेंगे | आखिर कौनसे हालत थे कि हमारी ही कौम के बड़े शायर में शुमार फैज़ साहब कहते है कि

“शेख़ साहब से रस्म ओं राह ना की                                                                                                                                 शुक्र है जिन्दगी तबाह ना की”

हमें हमारे महजब हमारी कौम की हालात, आज की जरुरत और कुरान के असली मतलब को समझना होगा | मॉडर्नआइज़न का ये कतई मतलब नहीं की आपकी बेटी या बहन साइबर सिटी की 8 बी इमारत के नीछे एक हाथ में सिगरेट लिए विराट कोहली के क्रिकेट से लाकर नित्थे के दार्शनिकता पर बहस करे और फिर क्या कहते  है अंग्रेजी में उसे आई डोंट हेव एनी प्रॉब्लम विथ अडलटेरी और हम बिस्तर हो जाये किसी के साथ भी | शराब पीना शौक नहीं फैशन बन रहा है जो नहीं पीते उन्हें चुतिया समझा जाता है |

अगर हमें कौम की इस मुल्क की हालत दुरस्त करनी है तो हमें खुद आगे आना होगा | हवाए आपके खिलाफ है अब जिम्मेदारी आप पर है | बदायूनी का  शेर है

“अब हवाए करेगी रौशनी का फैसला                                                                                                                               जिस दिए में जान होगी वो दिया रह जायेगा”

(कबीर कह गया था की चुतियो अल्लाह बहरा नहीं है- अजित  भारती  की  किताब  बकर  पुराण की  पंक्ति , चित्र – गूगल  से एवं  चित्र  का लेख से कोई लेना देना नहीं है प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से )

 

 

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