सोशल स्टार्टअप फैलोशिप

सहादत हसन मंटो ने कहा था कि एक लेखक तभी अपनी कलम उठाता है जब उसकी संवेदनशीलता पर चोट पहुँचती है | सामजिक उद्यमी वो होता है जो दर्द देखता है और उसे दूर करने के लिए एक बिजनेस तैयार करता है | शायद इसी तर्ज पर युनुस(नोबल विजेता) ने कहा कि “अगर समाज में कहीं समस्या हो तो उसे समस्या के आईस पाईस एक बिजनेस बनाना चाहिए |

माइकल यंग ने 1997 में स्कूल फॉर सोशल आन्त्रप्रिमियर का गठन यूके में किया | यूके,कनाड़ा और आस्ट्रोलिया में सफलता के बाद 2016 में सोशल स्टार्टअप फैलोशिप भारत में आई | SSE के प्रथम कोहोर्ट में भारत से 17 सामाजिक उद्यमी या यूँ कहना बेहतर होगा कि भविष्य के उद्यमी चुने गए है | एक देश, एक छत, एक उद्देश्य,एक दर्द, 17 व्यक्ति और 17 बिजनेस |

SSE का मानना है कि हर व्यक्ति में उल्लेखनीय करने की क्षमता होती है | भारत सरकार के लिए SSE एक विशेष महत्व रखता है और मिनिस्ट्री ऑफ़ स्किल डेवलपमेंट एंड अन्त्रोप्रिमियरशिप ने इसकी स्वागत किया है | शुक्रिया SSE मुझ पर और Go On India पर भरोसा जताने के लिए | 16 अनुपमेय फेलो पार्टीसिपेट को बधाईया जो भारत के विभिन्न जगह से विभिन्न क्षेत्रो में बदलाव की उम्मीद लिए लगे हुए है |

मुझे SSE और माइकल लिए कुछ पंक्तिया याद आ रहीं है कि

“उजला,उजला नजारा है हर किसी की नजर में                                                                                                             ये कौन है जो अँधेरे की ख़बर रखते है”

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