नागेश्वर पांचाल- दस कविताए

ईश्वर मर चूका है

बेतहाशा भाग रहें है,

बेकतार में, मृत्यु की ओर

आदमी, आदमियत,कुदरत और ख़ुदा |

कठघरे में सब के सब

किस पर चले मुकदमा

लाश दे रही है गवाही

सुनो

“मैं गीता पर हाथ रखकर कहता हूँ

ईश्वर मर चूका है” |

ख़ाली झूलते फंदे

एक अधूरी ग़ज़ल

मिट्टी में दफ़न हुई और

अंकुरित हो गए ,

असंख्य मतले |

वेदना, संवेदना, विषाद

रिश्ते, राजनीति, अहसास, एहसान

रकीब, हबीब

सब जोड़ दो

लेकिन गैरवाजिब

और नामुमकिन है

मतले का मकता होना |

यारो,

फंदे में गर्दन भयानक है ,

पर सबसे भयानक है

आँखों में बसे

असंख्य, अनन्त

ख़ाली झूलते फंदे |

(रोहित की आत्महत्या पर उसकी याद में )

गर्दन दर्द करने लगी है

आसमान को सीधा कर

एक दीवार बना लो |

गर्दन दर्द करने लगी है

कुछ लोगो की

सूरज को देखते देखते |

कुछ तो अजीब पागल है

कहते है सीधे सीधे,एक साथ तारे

अच्छे नहीं लगते

आसमान बुड्वक है

थोड़ी जात पात सिखावो

भला धुर्व तारा सबके बीच

कैसे रह सकता है ?

अरे इन सप्तर्षियों को तो

दिन में भी निकलना चाहिये |

जाने के कई रास्ते होते है,

सुबह सुबह उठ कर

दूध का

खाली पतेला देखा

तो समझ गया

बिल्ली जा चुकी है |

जरा सा अहसास नहीं होता,

दबे पांव जाते है ऐसे लोग |

कोई जाता है, आँख दिखाकर

तुम मेरे लायक नहीं |

कोई जाता है आँख बचाकर

बेपर्दा होकर मिलाई नहीं जाती |

वो पांव छु कर गया

लगता है बहुत दिनों तक लौटेगा नहीं

जो गले लगकर गया

याद आती होगी अब भी उसे

और तुम जबसे गए हो

तब से पीठ में दर्द है |

सच में

जाने के कई रास्ते होते है |

धीरे धीरे बन्दर बनाया जाता है जनता को
_______________________________________________

एक चतुर आदमी
एक हाथ से ताली बजा रहा है |
हमें लगता है कि
हमारी भी हथेली शामिल है
चारो ओर उठती इन आवाजो में |
लेकिन हमारी हथेली की जरुरत
नदारद है इस शोरगुल में |
बन्दर सोचता है कि
वो दिखा रहा है तमाशा
लेकिन हकीकत ये है कि
बन्दर तमाशा है |
भयानक है ये द्रश्य कि
बन्दर को तमाशा बनने पर
जरा भी दर्द नहीं |
धीरे धीरे बन्दर बनाया जाता है जनता को
ताकि कल कहीं चौक पर उसका
तमाशा बनाया जा सके |

काश कोई ट्रेन हमसे गुज़रकर

_______________________________________________________________

ऐसा माना जाता है कि

दो सामान्तर रेखाए

क्षितिज़ पर कहीं मिलती है |

लेकिन ये नहीं पता कि

क्षितिज़ कहाँ मिलता है |

शायद मिलना जरुरी नहीं है,

जरुरी है साथ-साथ समान्तर चलते रहना

क्षितिज़ की खोज में |

मिलना बिछड़ने की प्री- क्रिया है

तो मिलने की प्री- क्रिया

साथ साथ चलना तो कतई ना हुई |

हम दोनों पटरियाँ है,

काश कोई ट्रेन हमसे गुज़रकर

बनारस तक चली जाए |

 

मेरे जख्म को देख नमक डर जाता है

ये हाल मेरा बस उसी के सर से जाता है,

मेरे जख्म को देख नमक डर जाता है |

आसमान पर जो चलने लगे है वो अब

कभी कभी सर उनका जमीं से टकराता है |

मैं भी कुछ देर चल कर देखूं जरा

पर बता ,कोनसा रास्ता वापस नहीं आता है |

इसे हिकारत मानूं या कहूँ नादानी

सूरज जमीं पर गिरकर भी इतराता है |

ओडिसी किताब

अपना सा महसूस करता हूँ

हे ओडिसियस तुम्हे |

मैं तुमसा पराक्रमी नहीं

ना ही सूर्य सा आभामंडल मुझमे

तीर्वता में, मैं शून्य हूँ |

विवेक खो देता हूँ अक्सर

दिल के किसी छल में आकर |

ना तुम सी बुधिमत्ता,

ना वो अनुपमेय वाकचातुर्य |

किसी रणभूमि में नहीं मौजूद

मेरे जिस्म की एक भी बूंद

फ़िर भी

ओ ज्यूस-सम्भूत लेयरतीज के पुत्र ओडिसियस

जोड़ देता है मुझे, तुझसे

एक खामोस दर्द |

कहीं तुम मेरा अतीत तो नहीं हो गई |

__________________________________

मैं अतीत से

हाथ मिलकर चलता हूँ

और अतीत

मेरे पाँव खींचता है |

मैं भुलाना नहीं चाहता हूँ उसे

किसी चुनावी घोषणा की तरह |

मैं याद करता हूँ उसे रोज़,

किसी प्रेमिका के अधूरे वादे के माफ़िक |

अतीत से हम कुछ कह नहीं सकते.

अतीत हमारी जुबान छीन लेता है |

अतीत हमें सब क्कुह कह सकता है,

वो हमारे कान मजबूत करता है |

जो मैंने और उसने,एक साथ बिताया है |

वो मेरा और उसका, एक ही अतीत नहीं है |

वर्तमान का अतीत से वही रिश्ता है

जो भविष का वर्तमान से है |

अतीत किसी किसी दिन अचानक

आँखों के सामने आ कर खड़ा हो जाता है |

वर्तमान का अतीत हो जाना

एक धीमी प्रक्रिया है |

अतीत का वर्तमान में आ जाना,

इसके ठीक विपरीत है |

अतीत ऊर्जा को नष्ट किया जा सकता है

और पैदा किया जा सकता है, सिद्धांत का सबसे पुख्ता सबूत है |

ऊर्जा को एक रूप से दुसरे रूप में बदल सकते है |

तुम कभी चुपचाप बैठे बैठे मेरा रूप लयों नहीं बदल देती |

मैं भविष्य में खड़ा कहीं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ या

अतीत में कहीं नींद की झपकियाँ ले रहा हूँ |

अगर तुम चाहो तो, मैं वर्तमान होना चाहता हूँ |

अतीत से आँख मिलाना

उतना ही मुश्किल है

जितना तुमसे |

कहीं तुम मेरा अतीत तो नहीं हो गई |

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